राम मन्दिर 490 साल पूराना संकल्प

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राम मन्दिर 490 साल पूराना संकल्प
राम मन्दिर 490 साल पूराना संकल्प

राम का नाम आते ही बिगड़े काम बन जाते हैं लोगों के। तब राम जी पर आया संकट टलने में क्युं लग गये सदियाँ? पहले उनके मन्दिर को तोड़ा गया फ़िर वज़ूद मिटाने का पुरजोर प्रयत्न किया गया। मन्दिर तोड़ मस्जिद बनाया। सालों साल टेंट में बसते दिखे भगवान। राम मन्दिर के साथ क्या-क्या नहीं हुआ? सब लीला थी राम की क्यूंकि धरती ब्रह्मांड का सर्वश्रेष्ठ स्थान है जहां पर इन्सान हो या भगवान अपने अस्तित्व को बचाए अथवा बनाये रखने के लिए कर्म करनी ही परती है। तब तो देर सबेर अपने अपने कर्म का फल अवश्य मिलता है। वह कहावत है न “जाको राखे शांइया मार सके न कोई, बाल न बांका कर सके, जो जग बैरी होइ।” आखिरकार जब जब जो जो होनी है तब तब सो सो होती है । 

आज लगभग तीन दशक से मन्दिर में लगने वाले संगमरमर को तराशने का काम चल रहा था । विशेष जगहों से उच्च कोटि की संगमरमर ईंट एकत्रित किया जा रहा था। लोगों का अपने राम के ऊपर बना इक अटूट विश्वास ही था जो जरा सा भी नहीं डगमगाया। इतने लंबे समय के इंतजार के बाद अधुरा ख़्वाब आज पूरा होने जा रहा है। लोगों के खुशी का अंदाजा लगाना शायद ही मुमकिन हो। इस महामारी के समय में भी हर एक व्यक्ति अपना सहृदय मन की खुशी कीसी न किसी रूप में व्यक्त जरूर कर रहा है। 

अयोध्या हर कोई नहीं जा सकता है लेकिन राम जी के मन्दिर के शिलान्यास की खुशी में अपने ही घरों में दीप जलाकर कर रहे हैं। आज पूरा देश ऐसे जगमगा रहा है जैसे मानो राम जी बनवास से लौटे हों।

अभी मन्दिर का शुभारंभ हो रहा है। अगले तीन चार सालों में उम्मीदतः मन्दिर हमें मिल जाएगा। एक सौ इकसठ फीट की ऊँचाई, तीन एकड़ में फैली मन्दिर की चौड़ाई, तीन मंजिला इमारत इस मन्दिर को पूरे विश्व में भव्य तथा दार्शनिक बनाती है। सरयू नदी के तट पर बसा अयोध्या मानो हमें राम कथा का गुणगान हर पल कराती है। 

इतनी बड़ी खुशी में अगर हम अपने सक्रिय बी जे पी सरकार का आभार व्यक्त न करें तो यह हमारी धृष्टता होगी। सरकारें तो कई आयी और गई लेकिन हमने जिस उम्मीद के सहारे बीजेपी को दुबारा पूर्ण बहुमत से जिताया था वह सफल हो गया। हमें हमारा राम मन्दिर मिल गया।इस खुशी के अवसर पर माननीय श्री प्रधान मंत्री मोदी जी एवं मुख्यमंत्री श्री योगी जी का सहृदय आभार व्यक्त करते हैं।

दो शब्द राम मन्दिर पर….. 

राम जी आये जब  अंगना हमारे, 
दीप जलाए फूल बिछाए शबरी बन राह निहारे। 
हर राह को  अंखियों के नीर पखारे,
राम जी आये जब अंगना हमारे। 
युगों युगों का संकल्प है ठाण, 
मिल गया है देखो राम को उनका धाम 
बनवास सभी काट के देखो, घर वापस आ गए भगवान।

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