सादगी में सुन्दरता

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सादगी में सुन्दरता
सादगी में सुन्दरता

जहां प्यार होता है वहीं आदर होता है। जहां अपने होते हैं वहीं रूठना मनाना होता है। आये दिन हमारे जीवन में छोटी बड़ी गलतियां होती रहती है। हम इंसान है इसलिए गलतियों से सीखना हमारा स्वाभाव है। हमारे जीवन में हम कयी रिश्तों को जीते हैं। जिनमें सबसे पवित्र और अदारनीय रिश्ता पति पत्नी का होता है। इसे जोड़ते तो दूसरे है, लेकिन इसे सारी उम्र जीते और सँभालते तो पति पत्नी ही है। इस रिश्ते मै जितना आदर हैं उतना ही प्यार है, जितना नाराजगी होती है उतना ही क्षमा की भावना होती है। इस रिश्ते के सुरु से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक प्रेम की भावनाऐं एक सी होती हैं। बस कभी कभी थोड़ी बहुत बदलाव की जरूरत होती है।

इसी प्रेम और उतार चढ़ाव के बीच जी रहा था राधा और अमर का रिश्ता। इसी उतार चढ़ाव और छोटी बड़ी कठिनाइयों को पार करते हुए दोनों अपनी अपनी जिम्मेदारीयों में ऐसे उलझे थे कि उनको अपनी आधी उम्र ढलने का पता ही नहीं चला।दोनों एक दूसरे की इज्जत तो करते ही थे, परवाह भी करते थे। बस वो प्यार कहीं दब सी गयी थी, जो सालों पहले एक दूसरे से करते और जताते थे |

इसी दौरान राधा की मुलाकात उसके बचपन की सहेली अवनी से हुई। दोनों कयी सालों बाद एक दूसरे से मिलि थी । इसलिये दोनों बहुत खुश थी दोनों ने काफी देर तक एक दूसरे से बातें की। फिर अगली बार मिलने का वादा किया। और अपने अपने घर चली गई। राधा अवनी के इस उम्र में भी इतनी जिंदादिल और उसके चेहरे की चमक देख कर काफी प्रभावित हुई थी। और साथ ही उसे अपने रेहन सेहन और अपनी अवस्था पर काफी शर्मिंदगी भी हो रही थी। फिर सोचती है कि अवनी के पास कोई जिम्मेदारी नहीं होगी इसलिए वो सारा समय खुद को सवारने में लगाती होगी। लेकिन मेरे पास इतने सारीp जिम्मेदारीयां हैं। में उनका ध्यान रखूँ या अपना, इसी जद्दोजहद में खोई थी राधा की तभी अवनी का फोन आया और वो एक पते पर राधा को बुलाती है राधा भी खुशी खुशी मिलने जाती है |

अवनी राधा की मनोस्थिति को काफी हद तक समझ चुकीं थी। उसने राधा से अपने अंदर कुछ बदलाव लाने को कहा, राधा थोड़ा हिचकीचाई, लेकिन अवनी के जोर देने पर तैयार हो जाती है।और अपने आप में कुछ बदलाव लाती है रहन सहन पहनावा ओढावा को बदलती है। इस बदलाव के साथ जब वो घर आती है। तो सबसे मिला जुला प्रतिक्रिया देख कर उसे कोई खास खुशी नहीं होती। फिर भी वो रोज कुछ नया करने की कोशिश करती, लेकिन अब वह मिलाजुला प्रतिक्रिया भी आना बंद हो गया। इस से राधा बहुत दुःखी रहती थी और हर वक़्त एक खिंचाव सी बनी रहती थी। जिस कारण कभी भी किसी पर बरस परती। ऐसे में राधा के चहरे पर हर वक़्त एक दर्द और उदासी सी बनी रहती थी। जिससे तंग होकर एक दिन दोपहर के समय में राधा कहीं चली गई। शाम के वक्त जब अमर घर आया तो राधा को ढुंढा लेकिन वो कहीं भी नहीं दीखी। परीवार वालों से पूछने पर पता चला कि दोपहर से ही कहीं चली गई। फोन भी नहीं ली है। इससे अमर को बड़ी चीन्ता हुई और राधा की तलाश में निकला। हर जगह पर ढुंडा जहां भी राधा जा सकती थी। लेकिन वो कहीं भी नहीं मीली। सहसा अमर को उस जगह की याद आई जहां पर शादी के बाद अमर अक्सर राधा को घुमाने और प्यार भरी बातें करने के लिए ले जाया करता था। और बीना समय नष्ट कीऐ अमर उसी जगह पर पहुंच गया। तो उसने राधा को वहीं रोते हुये पाया। अब अमर को राधा की मनोस्थीती का पूर्ण रूप से एहसास हो गया और सहसा उसे अपनी व्यस्तता का भी ऐहसास हो गया। फीर तो दोनों को कुछ भी कहने अथवा सुनने की जरूरत ही नहीं परी। और जब दोनों घर लौटे तो ईस बार राधा के चेहरे पर वही 15 साल पुरानी चमक और खीलापन साफ दीखाई दे रही थी। अब तो उसे अपने झुर्रियों और ढलती उम्र की भी कोई परवाह नहीं थी। इससे ये तो साफ़ है कि हर रीस्तों को एक दूसरे की कद्र और अपनेपन की जरुरत हमेशा ही होती है।

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