सच्चाई या धोखा !

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सच्चाई या धोखा !
सच्चाई या धोखा !

हमारी जिंदगी वैसे ही कई उलझनों में उलझी हुई है। कभी हम किसी मानशिक तनाव से गुजरते हैं तो, कभी शारीरिक पीड़ा से। कुछ परेशानियों हमारी खुद की लापरवाही के कारण होती है। तो कुछ हमारी किस्मत से।

आज के इस प्रदूषित वातावरण में ऐसा कोई परिवार नहीं है जो किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त न हो। कोई परिवार गम्भीर बीमारी से तो कोई मामूली से।

लेकिन आज मैं बात कर रही हूँ एक ऐसी परेशानी या बीमारी के बारे में जिसे लोग समलैंगिक कहते हैं। माना कि ये एक बीमारी है, लेकिन इसका होना न तो पूरी तरह से कुदरती है और न ही गलति पुरी तरह से इन्सानों की होती है।

कुछ लोगों का मानना है कि समलैंगिक एक बीमारी है। और इस बीमारी से ग्रस्त इन्सान एक मानसिक रोगी है। चलिए कुछ तथ्य देखते हैं और फिर विचार करते हैं। इसे हम क्या कह सकते हैं।

समलैंगिक की शुरुआत माँ के गर्व में ही हो जाती है। गर्व में ही एक तरह के हार्मोन की कमी के कारण, बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास में बदलाव आने लगता है

समलैंगिक बच्चों की परवरिश अगर सिर्फ माता के द्वारा लड़की बच्चे की और पिता के द्वारा लड़के की परवरिश हुई हो। तो भी ये मानसिकता बच्चों में दिखाई दे सकती है

समलैंगिक बच्चों में समान लिंग वाले बच्चों से गहरी मित्रता भी कभी-कभी इसका कारण बन सकता है।

समलैंगिक एक तरह का विचार या आकर्षन है जो शुरुवाती समय में उन इंसानो में दबी रहती है जिसका बदलाव धीरे धीरे पता चलता है वो भले किसी के साथ भी रहते हों या संबंध बनाते हों। लेकिन जब वो अपने जैसा किसी से मिलता या रेहता हो तब उसे समलैंगिक होने का एहसास या पता चलता है।

इन सब को जानने के बाद हम पूर्ण रूप से समलैंगिक लोगों को मानशिक रोगी बोल सकते हैं क्या? ये बात भी सही है कि समलैंगिकता हमारे समाज पर एक बुरा असर डाल सकता है।

लेकिन उच्च न्यायालय के दखल के बाद अब सरकार ने भी समलैंगिकता को मान्यता दे दी है। और इसमें कोई गलत बात भी नहीं है।

हर इंसान की अपनी एक जरुरत होती है। या फिर इच्छा होती है। जिसे हम अक्सर पूरा भी करते हैं। तो समलैंगिक होना भी तो एक शरीर की मांग ही तो होती हैं। तो हम उसे क्युं नहीं स्वीकार सकते हैं

समलैंगिक होना किसी इंसान की गलती नहीं है बल्कि उनके परिवार वालों की गलती है जो अपने बच्चों पर उनकी परवारिश मै लापरवाही रखतें हैं। आप समय रहते अपने बच्चों के हार्मोन के उतार चढ़ाव में आए बदलाव पर ध्यान क्युं नहीं देते हैं? हर सही गलत रास्ते पर चलते समय उनका मार्गदर्शन क्युं नहीं करते हैं?

जब गलतियां हम करें और दोष उनको दें। समय निकलने के बाद। उनके प्रति जोड़ जबर्दस्ती या हीन भावना रखने से कोई लाभ नहीं है। उनको प्रताड़ित करना उनसे घृणा करना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।

ये देश हमारा है देशवासि हमारे हैं। इनको समय समय पर सही गलत का बोध कराना हर इंसान का कर्तव्य है।

सबसे महत्वपूर्ण बात नकारात्मक सोच या माहोल हमेशा अपराध की भावना या अपनो से दूरी ही पैदा करता है । और आज के समाज में हमें सकारात्मक सोच की जरूरत है। कीसी भी इन्सान से घृणा अथवा उसकी अवहेलना कीसी भी समाज के लिए सही नहीं है। इसलिए जागरूक बने और जागरूकता फैलाएं। घृणा अथवा प्रेम सोच से की जाती हैं इन्सानों से नहीं।

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