समाज में बढती अपराधिक घटनायें

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समाज में बढती अपराधिक घटनायें
समाज में बढती अपराधिक घटनायें

आज हमारे समाज की स्थिति अत्यधिक भयावह हो गई है। जहां नजर घुमाओ वहीं अपराध अपना पैर पसारे घूम रहा है। हर जगह हत्या, बलात्कार, चोरी, डकैती, अपहरण बस यही नजर आता है। क्या हो गया है हमारे समाज को लोग क्युं इतने क्रूर होते जा रहे है। क्या हमारे अंदर की इंसानियत, परोपकार, दया इन सभी प्रकार की भावनाए खत्म हो चुकी हैं। आखिर जब कोई व्यक्ति अपराध करता होगा तो उसे छन भर का ही न सुकून मिलता होगा। उसके बाद वह व्यक्ति उस अपराध के आग में सारी उम्र ही जलता होगा। 

वैसे तो आज का समय इतना भयावह है कि हमारे बच्चे बच्चीयां अपने घर में भी सुरक्षित नहीं है। कभी अपनों के हाथों शोषित होते हैं तो कभी गैरों के हाथों। जब घर में बच्चें इतने असुरक्षित है तो फिर जरा सोचिए बाहर गैरों के बीच वह अनाथ बेसहारा बच्चे कैसे सुरक्षित होंगे। 

यह सोचकर ही हमारी नजरें शर्म से झुक जाती है। की आज अनाथ, लाचार, बदकिस्मत यह बच्चें जिन्हें अपनों ने समाज ने दुत्कार दिया। उनको सहारा और सुरक्षा देने के बजाए हम उनका ही शोषण कर रहे हैं। उन बेसहारा लाचार बच्चों को सहायता और सुरक्षा देने हेतु सरकार ने हर शहर हर जिले में शेल्टर होम (आश्रय घर) बनाया। जहां का पूरा खर्चा बच्चियों की पढ़ाई भोजन कपड़े अथवा हर सुविधाओं की जिम्मेदारी सरकार ने उठाया है।

यह पहल तो बहुत ही अच्छी और सराहनीय हैं। लेकिन अब लगने लगा है कुछ स्वार्थी लोग इसमें भी अपना स्वार्थ और लालच ही देखने लगे हैं। 

तब ही तो हमें आज मुजफ्फरपुर की शेल्टर होम कि स्थिति देख कर हमारी अन्तर आत्मा तक हिल गयी है। उन बच्चियों के सुरक्षा के नाम पर जो वहां के तथाकथित सुरक्षा कर्मियों या कह सकते हैं उन बच्चों के माता-पिता समान लोग। जिनकी सुरक्षा में उन बच्चियों को आजादी का अनुभव होना था। वहीं तथाकथित अपनों के स्वार्थ का सामान बन के रह गई।

जिनको जिम्मेदारी दी गई थी उन शेल्टर होम की उन्ही लोगों ने स्वार्थ में अंधे हो कर उन बच्चों का शोषण करने लगे। आय दिन उन बच्चियों के मान सम्मान को तार तार करने लगे उन बच्चियों का शोषण करने वाले कोई एक नहीं है बल्कि इस शेल्टर होम से जुड़े निम्न स्तर से लेकर उच्च स्तर पर रहने वाले अथवा सुनने में यह भी आया है कि जो निरीक्षण के लिए आते थे वह सब भी इन सभी अपराधों से कहीं न कहीं से जुड़े हुए थे। इन बच्चियों का शोषण सिर्फ शेल्टर होम में ही नहीं बाहर ले जाकर भी किया जा रहा था। कितनी ही बच्चीयां इस शेल्टर होम से गायब भी हुयी है। 

यह सब देखकर तो हमें यह समझ ही नहीं आता कि हम किस पर भरोसा करें। यह अनाथ बेसहारा बच्चियां कहां जाय कौन इनको सहारा देगा। किन पर यह सब विश्वास करेंगी।

हाल ही में सुनने में आया है कि यह सिर्फ मुजफ्फरपुर की ही घटना नहीं है। उत्तरप्रदेश से भी खबर है कि वहां के कई शेल्टर होम से बच्चीयां गायब भी है। अब जबकी सभी शेल्टर होम की जांच करवायी जा रही है। और सब कुछ सही तरीके से हुआ तो सब कुछ सामने जरूर आयेगा। अब बस हमे और हमारी सोशल मीडिया को थोड़ा धैर्य और हिम्मत रखने की जरूरत है।

सरकार से यह दरख्वास है कि वो इस बार बिना समय गंवाए अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाए। जिससे कोई भी अपराध करने से पहले यह सोच कर ही डर जाए कि इस अपराध की सजा क्या है? एक लड़की और इंसान होने के नाते मेरा मानना है कि सजा देने का हक़ हमेशा पीड़िता को ही मिलना चाहिए। जो इतने समय से इतना कष्ट सह रही है। उनको थोड़ा तो उस घाव पर मरहम लगने के समान सुकून का अनुभव मिलेगा।


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