सुरक्षित जानवर संतुलित प्रकृति

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सुरक्षित जानवर संतुलित प्रकृति
सुरक्षित जानवर संतुलित प्रकृति

अगर किसी की जीवन के हालात जाननी है तो उसके बेहद करीब जा कर देखिये या कुछ समय के लिए स्वयं को उसके स्थान पर रख कर देखिये। अच्छी-बुरी, दर्द-खुशी सब पल भर में पता चल जाएगा। आपने “पिंजरे का तोता” वाली कहानी तो सुनी ही होगी किस तरह जंगली तोते की बातों में आके पिंजरे के तोते ने अपनी मालिक की बात नहीं मान कर मालिक के प्रेम की परीक्षा लेनी चाही जिसका खमियाजा उसे अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी। कुछ ऐसा ही प्रेम इंसान और बेजुबान जानवरों के बीच में है। जरूरत के अनुसार जिन्दगी है l

आज हम बात कर रहे हैं उन जानवरों की जो बेज़ुबान है। जिनको हम सिर्फ़ अपने मनोरंजन के लिए अपने आसपास रखना या देखना पसंद करते हैं। उन जानवरों को अपने हिसाब से इस्तेमाल करना चाहते हैं। चाहे इसके लिए हम उनको दर्द भरी चोटें भूखा रखना अथवा उम्र कैद की सजा ही क्युं न दे रहे हों । सही मायने में उनके सुख-दुःख से हमें कोई मतलब नहीं होता। जब हम अपने स्वार्थ अथवा शौक के लिए जो दिखाई देने वाला उनका दर्द है हम उसे ही नहीं पहचान पाते हैं तो उनके अन्दर छुपे कष्टों को कैसे पहचान सकेंगे ।

य़ह स्थिति किसी एक जानवर की नहीं है, हम जिन पशुओं का पालन अपने स्वार्थ के लिए करते हैं कभी उनकी स्थिति का भी जायजा लेके तो देखिये। वास्तविकता पता चल जाएगा। 

हम कितने ही तरह के पशुओं का पालन करते हैं दूध, मांस, अंडे, अपने शौक, मनोरंजन, जरूरत और भी न जाने कितने ही चीज़ों के लिए इन जानवरों से हम अपना सारा स्वार्थ निकालते हैं। और इनका ध्यान रखने के बजाय इन्हें निर्जीव प्राणी समझ इनका शोषण करते हैं। ज़रूरत खत्म इनसे हमारा रिश्ता खत्म। 

हम जंगली जानवरों को कैद कर के अपने मनोरंजन के हिसाब से इस्तेमाल करते हैं। और जब ये जानवर सारी यातनाएं सह कर, कभी अगर हमारी लालसा को पूरा नहीं कर पाते हैं तो हम उनके उपर जुल्म करते हैं भूखा-प्यासा रखते हैं मार पीट करते हैं। कितने ही तरह के यातनाएं देते हैं अपने स्वार्थ के अनुसार काम लेने के लिए। 

कितने ही जानवरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जा कर बेच देते हैं माँ को बच्चों से अलग कर देते हैं। अपने स्वार्थ हेतु जिंदा जानवरों का उपयोग तो करते ही हैं कुछ को तो अपने स्वार्थ के लिए मार कर उनका चमड़ा दांत यहां तक कि हड्डियों तक को बेच डालते हैं। 

आज इंसानो को क्या हो गया है क्युं दूसरों के दर्द की कोई कीमत नहीं होती। कहीं इंसानो की तस्करी की जाती है तो कहीं बेजुबान जानवरों की। हम जिस तरह से इन जानवरों का शिकार कर रहे हैं। उस तरह तो धरती की सारी सुन्दरता ही समाप्त हो जाएगी। आज हम देख रहे हैं धरती से कितने ही जानवरों के प्रजाति विलुप्त हो गई है। जिनको हम सिर्फ़ किताबों या टीवी के द्वारा ही देख या जान पाते हैं। वह दिन दूर नहीं जब हम अभी दिखने वाले जानवरों में भी कितने ही प्रकार के जानवरों को अपने आने वाले भविष्य में देख पाएंगे। डायनासोर की ही तरह शेर बाघ विभिन्न प्रकार के साँप, विभिन्न प्रकार की मछलियां और भी ना जाने कौन कौन से जानवर इन सबको भी सच्चाई में देख पायेंगे या य़ह भी सिर्फ किताबी ज्ञान बन कर ही रह जाएंगे । 

जिस तरह पेड़ पौधों से हमारी जिंदगी है उसी तरह विभिन्न प्रकार के जानवरों से धरती की सुन्दरता है। पेड़ पौधों को बचाना हमारी जरूरत है और जानवरों को बचाना हमारा कर्तव्य है। अगर धरती पर समानता बनाए रखना है तो। दोनों (जानवर और पेड़ पौधों) को बचाना हमारी खुद की जरूरत है। कुदरत के बनाये हुए प्राकृतिक सुंदरता है पेड़ – पौधे, नदीयां, पर्वत जानवर अथवा मनुष्य। इन सभी को धरती पर रहने और सुकून से जीने का हक्क है। मेरा हर उस इंसान से सहृदय निवेदन है कि जो भी व्यक्ति जानवरों को अपने शौक या जरूरत के लिये पालते है। कृपया उन जानवरों को भी अपने परिवार का सदस्य समझें और उनको वही स्नेह और प्रेम दे। अपने आसपास अगर कहीं कोई जानवरों की तस्करी करता हो या उसे यातनाएं पहुंचा रहा हो तो उसे बचाने में आपसे जो कुछ भी हो सकता है वह जरूर कीजिएगा। तब ही तो हम धरती पर समानता कायम करने में सक्षम हो पाएंगे। सुरक्षित रहें अथवा सुरक्षित रहने दें।


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