तन्वी सेठ के पासपोर्ट के अनसुलझे पहलु

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तन्वी सेठ के पासपोर्ट के अनसुलझे पहलु
तन्वी सेठ के पासपोर्ट के अनसुलझे पहलु

तन्वी सेठ का पासपोर्ट निर्गत होना अपने आप की एक घटना है | तन्वी सेठ का सर्टिफिकेट नाम तन्वी है साथ ही शादी के बाद निर्गत निकाहनामा में, जो उन्होंने अपने आवेदन संलग्न किया है उसमे शादिया हसन दर्ज है | बदले हुए  नाम का   उल्लेख उन्होंने अपने आवेदन में नहीं किया है | वो १२ साल  से लगातार नॉएडा में रहती है और उसके पति लखनऊ में रहते हैं | लखनऊ पासपोर्ट कार्यालय में  पासपोर्ट के लिए तन्वी और उसके  पति अनस सिद्दीकी ने क्रमशः नए एवं नवीकरण के लिए आवेदन दिया |

ये सारी बातें उन्होंने खुद लिखित रूप से आवेदन में स्वीकार किया   है | तन्वी सेठ ने विदेश मंत्रालय को जो ट्वीट किया उसमे कहा गया है की उसे  धर्म के नाम पर पासपोर्ट पदाधिकारी श्री मिश्रा ने परेशान किया   उससे वह बहुत आहात हुई है आदि आदि | ट्वीट को विदेश मंत्रालय ने गंभीरता से लिया और लखनऊ पासपोर्ट कार्यालय को निर्देश दिया की पासपोर्ट निर्गत किया जाये !

निर्देश के आलोक में श्री मिश्रा को स्थान्तरित कर दिया गया   तथा तन्वी सेठ को पासपोर्ट निर्गत कर दिया गया | सवाल   उठता है की विदेश मंत्रालय के निर्देश पर क्या पासपोर्ट कार्यालय को बिना कोई जाँच किये पासपोर्ट निर्गत   करना    नियमानुकूल है ! अगर पासपोर्ट कार्यालय ने घंटों में जाँच की   सारी प्रक्रिया  करली तथा कागजातों को सही पाया तो पासपोर्ट निर्गत करना अच्छी बात है | यह कार्य कुसलता का परिचायक भी  है | 

सिर्फ निर्देश के   आलोक    में सम्बेदंशील दस्तावेज़ को आनन फानन में निर्गत करना   कतई उचित नहीं है और निर्गत करने वाले पदाधिकारी पर   कारवाई की जरुरत है | विदेश मंत्रालय के निर्देश के आलोक में भी पासपोर्ट कार्यालय को जाँच की प्रक्रिया त्वरित रूप से पूरा करना   चाहिये | ऐसा नहीं करना   विहित प्रक्रिया की अनदेखी करने के साथ – साथ देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होना हुआ | इस आधार पर बहुत   सारे पासपोर्ट को निकलने की सम्भावना बन जाती है यह चिंता का विषय है |

एक और जरुरी मुद्दा  है जिसपर ध्यान देना जरुरी है और वह है अगर पासपोर्ट  कार्यालय मंत्रालय  निर्देश के  आलोक में डर कर या घबरा कर कोई गलत   काम कर लिया हो तो यह एक बहुत ही गंभीर मामला होगा | पासपोर्ट कार्यालय हो या कोई और उसमे किसी मुद्दे पर कार्यवाई त्वरित होनी चाहिये मगर विहित  प्रक्रियाधीन | किसी धर्म या जाति के आधार पर किसी तरह  की करवाई करने की मंशा  को  हतोत्शाहित करना चाहिये | कोई भी  कार्यालय एवं सम्बंधित मंत्रालय को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है | 

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