तीन तलाक : एक अभिशाप था जो ख़त्म हुआ

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तीन तलाक : एक अभिशाप था जो ख़त्म हुआ
तीन तलाक : एक अभिशाप था जो ख़त्म हुआ

तीन तलाक पर रोक नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक और कदम है | साथ हीं एक देश एक कानून के सिद्धांत को लागू करने की प्रक्रियाओं का पहला चरण है | सरकार के इस प्रयास का स्वागत है | देश की आधी आबादी के तिहाई भाग के मान और सम्मान की रक्षा की गई है | इस तिहाई के लगभग अस्सी प्रतिशत को जिनको अपने सामाजिक एवं सांकृतिक अधिकारों की जानकारी तक नहीं थी उनको उससे अवगत कराने तथा सशक्त बनाने का यह प्रथम प्रयास है | यह पहला अवसर है जब सरकार का ध्यान वर्षों से चली आ रही सामाजिक कुव्यवस्था को दूर करने की ओर गया है |

विश्व के इस्लामिक देशों में सबसे बड़ा देश इंडोनेशिया है जहाँ १९७४ में हीं तीन तलाक को सामाजिक बुराई मानते हुए गैरकानूनी करार कर प्रतिबन्धित किया गया | हमारे पड़ोसी देशों पाकिस्तान एवं बांग्लादेश में भी तीन तलाक पर प्रतिबन्ध है | लेकिन अपने देश में धर्मनिरपेक्षता की आड़ में इस बुराई पर अंकुश लगाने में कई दशक लग गये | आज तीन तलाक को संसद द्वारा अपराधिक मामला घोषित किया गया गया है | सुप्रीम कोर्ट ने दो साल पहले हीं एक साथ एक हीं बैठक में तीन तलाक बोल कर तलाक को अंजाम देने की प्रथा को असंवैधानिक बताया था और मुस्लिम महिलाओं के मूल अधिकार का उल्लंघन करार दिया था | सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को मुस्लिम मुल्लाओं ने नहीं माना और तलाक का सिलसिला जारी रहा | मुल्लाओं के आगे सुप्रीम कोर्ट का आदेश बौना दिखने लगा | इस कारण मामला संसद में लाया गया |

सरकार के कई कार्यक्रम महिलाओं की दशा के उत्थान के लिए तैयार किये गये | मगर मुस्लिम रूढ़िवादिता एवं हर अच्छे भले को धर्म के चश्मे से देखने के चलते उनकी महिलायें पिछड़ती चली गई | शिक्षा स्वास्थ्य एवं रोजगार से दूर होती रही | इसके अतिरिक्त तीन तलाक से बचने के लिए उनमें हमेशा डर और भय का वातावरण रहा | वो हमेशा इस बात का खयाल रखने को मजबूर थी कि उनका कोई ऐसा कदम नहीं हो जो उनके पति को पसंद न हो | घर के अन्दर और बाहर भी सशंकित रहना उनके भाग्य का हिस्सा था | मोबाईल फ़ोन पे सन्देश से , फ़ोन कौल से, चिठ्ठी के द्वारा जिस मजहब में तलाक वैध हो जाता हो वहां महिलाओं के अन्दर भय का होना स्वभाविक है | पढ़ी लिखी महिलाओं को ज्यादे सतर्क रहना पड़ता था | जो कभी गृह लक्ष्मी हुआ करती थी उसे ग्रह लक्ष्मी करार कर सामाजिक रुप से अमान्य कर दिया जाता था |

गाँव, मोहल्ले और शहरों में अगल बगल साथ रहने वाले हिंदू मुसलमान सिख एवं इसाई बड़े आराम से रहते हैं | घरों की महिलायें एक दुसरे के पर्व त्योहारों में हाथ बँटाते हैं | हाट बाजार साथ जाना, साथ खरीदारी करना आम बात है | लेकिन घर के अन्दर मुस्लिम पति-पत्नियों का सम्बन्ध अन्य धर्मो की इस जोड़ी से अलग होता है | उन पत्नियों को शक के साये में जीना पड़ता है | यह एक अभिशाप था जिसे नरेन्द्र मोदी की सरकार ने कानून से मिटाकर कल्याणकारी काम किया है | सरकार के लैंगिक समानता अभियान का प्रभाव मुस्लिम महिलायों पर बहुत क्षीण मगर अन्य पर बहुत लाभकारी सिद्ध हुआ है | तीन तलाक प्रतिबंधित हो जाने के बाद मुस्लिम महिलाओं को अब एक नयी जिन्दगी मिलेगी | वे भय मुक्त होंगे और अभिव्यति के सामाजिक अधिकार से उन्मुक्त वातावरण में साँस लेने का लाभ उन्हें मिलेगा | कुण्ठित प्रतिभाएँ जागृत होगी और उनका जीवन स्तर उठेगा | देश हित में जीवन की मुख्य धारा में उनकी भागेदारी बढ़ेगी | समाज समृद्ध होगा | समाज में सौम्य शान्ति एवं समृद्धता लाने के लिये मुस्लिम समाज की कुछ और कुप्रथाओं को दूर करने का एक साहसिक कदम सरकार को और उठाने होंगे | इसके बाद हीं लैंगिक समानता का पूर्ण लाभ उन्हें महसूस होगा |

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