वाजपेयी जी को समर्पित कुछ पंक्तियाँ

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वाजपेयी जी को समर्पित कुछ पंक्तियाँ
वाजपेयी जी को समर्पित कुछ पंक्तियाँ

हमने देखा कई सितारें इस धरती पर, 
अटल जी जैसा कोई न देखा। 
जो अटल रहा वह अपने हट पर, 
डिगा सका न कोई भी मिल कर, 
गिरि जैसा अडिग रहा अपने दम पर। 
बन गया अनमोल रत्न वो प्यारा, 
बन गया कब आदर्श पग वह हमारा ।
उपलब्धियों का यह है सागर, 
जिसने चाहा उसने भरी है गागर। 
ताकत दिया तुमने बनाया सशक्त, 
दिखाया विकाश बनके अटल। 
जीना मरना सबसे उठकर, 
बन गया वह अनमोल रत्न अमर। 
जिस पत्थर पर भी डाली नजरें, 
तराश के रख दिया उसको इस जग में। 
काम किया है मन से दम तक, 
भारत की शान समझ कर। 
फूल काँटों को अपने दामन में भरकर, 
सबको एक सा तराशा रत्न समझ कर।। 
आज चल दिये तुम यह कौन सी युग में, 
अभी न हुआ था काम यह पूरा, 
कौन सुनेगा अब फरियाद हमारी, 
कौन सुनायेगा हिम्मत से भरी हुई 
काव्य कविता। 
जिसके दम पर जी ली थी हमने 
जाने कितनी युग युगों तक। 
आज जाने कैसा डर समाया, 
उठ गया मानो सर से पितामह का साया। 
कौन बंधाए ढाढस मन का, 
किसको सुनायें मन की गाथा।


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