विकराल बेरोजगारी

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लॉक और अनलॉक की प्रक्रिया से अगर सबसे ज्यादा असर किसी पर पड़ा है तो वो है अर्थव्यवस्था और रोजगार । बेरोजगारी से न केवल देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई अपितु नागरिकों के व्यकितगत जीवन पर भी प्रभाव पड़ा है इसके साथ ही सामाजिक ढाँचा भी प्रभावित हुआ है। बेरोजगारी का मुद्दा ऐसा हो गया कि सरकारें युवाओं को इसका लॉलीपॉप देकर सत्ता में आ जाती हैं ,उसके बाद रोजगार पर चर्चा करने से भी कतराती हैं। पिछले साल बिहार के विधानसभा के चुनाव में रोजगार के मुद्दे पर मतदाताओं को रोजगार का लॉलीपॉप देकर वोट बैंक हासिल की गई।
ऐसी अनगिनत सरकारें हैं जो भारत से बेरोजगारी हटाकर विकास करने के बड़े -बड़े वादे करती तो नजर आती हैं लेकिन जैसे ही वो इन वादों की सीढ़ी बनाकर सत्ता में आती हैं वैसे ही इन मुद्दों को जला कर इनकी अस्थियाँ खाई में फेंक दी जाती हैं ,कहने का मतलब अपना उल्लू सीधा होते ही सरकारें जनता से करे गए अपने सभी वादे भूल जाती हैं। बेरोजगारी का मुद्दा इतना नग्न नहीं कि इसे नजरअंदाज किया जा सके । भारत एक विकासशील देश है ऐसे में बढ़ती बेरोजगारी देश को और पीछे धकेल सकती है। यह मुद्दा इतना विशाल है जिसे चाह कर भी सरकार अनदेखा नहीं कर सकती। ये भारत के विकास में एक विशाल पहाड़ जैसा होता जा रहा है। बेरोजगारी अनेक समस्याओं की जननी है इसमें कोई दो राय नहीं है। इसके कारण भुखमरी बढ़ती और भुखमरी के कारण अपराध में बढोत्तरी होती है।अब भारत की भुखमरी में बात करें तो इसका अनुमान आप जीएचआई रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट 2020 में जारी आँकड़ों के मुताबिक भुखमरी में भारत की रैंकिंग 94वें पायदान पर थी ये रैंकिंग 107 देशों के लिए की गई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार 27.2 के स्कोर के साथ भारत भूख के मामले में गम्भीर स्तिथि में है और वहीं अगर भारत में अपराध की बात करें तो 2018 के राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आँकड़ों के अनुसार प्रतिदिन 26 युवा बेरोजगारी के कारण मरते हैं।

सीएमआईई (CMIE) की हालिया 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बेरोजगारी की स्थिति —
CMIE आर्थिक और व्यावसायिक डाटा उपलब्ध कराता है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की 2021की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 15 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं। 2020 का बेरोजगारी का आंकड़ा 6.68 प्रतिशत रहा था जिसमें शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर 8.45 प्रतिशत वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 5.88 प्रतिशत थी।
2021 के आँकड़ो के अनुसार भारत में इस साल बेरोजगारी दर 8.32 प्रतिशत है ।वहीं शहरी इलाकों में बेरोजगारी 9.78 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 7.64 प्रतिशत।

राज्यों में बेरोजगारी की स्थिति , बेरोजगारी में हरियाणा शीर्ष पर –

बेरोजगारी में सबसे आगे कुछ राज्य है इसमें सबसे प्रथम स्थान पर हरियाणा है जिसका बेरोजगारी का आँकड़ा 35 प्रतिशत है। वहीं दूसरे स्थान पर राजस्थान है जिसका आँकड़ा 26.7 प्रतिशत है। बेरोजगारी में तीसरे पायदान पर झारखंड है जिसका आँकड़ा 16.0 प्रतिशत है। चौथे स्थान पर त्रिपुरा जिसका आँकड़ा 15.6 प्रतिशत ,पाँचवे स्थान पर जम्मू और कश्मीर व बिहार जिनका आँकड़ा 13.6प्रतिशत है। छठे स्थान पर गोवा और सातवें स्थान पर दिल्ली जिसका आँकड़ा 11.6 प्रतिशत है। बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार को जल्द ही निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता है। सरकारी नौकरियों में रिक्त पदों पर भर्ती करके सरकार कुछ हद तक बेरोजगारी को कम कर सकती है एक सर्वे के मुताबिक भारत में केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में 60 लाख से अधिक पद खाली हैं। ये कहना भी अनुचित होगा कि सरकार की ओर से बेरोजगारी को कम करने के लिए प्रयास नहीं किए जा रहे। सरकार भी अपने स्तर पर बेरोजगारी को कम करने के प्रयास कर रही है जिसमें लोन की सहायता से बेरोजगारों की मदद की जा रही है। वहीं सरकार ने बेरोजगारी से निपटने के लिए निम्न योजनाएँ भी शुरू की है जैसे कि “प्रधानमंत्री रोजगार योजना”, मेक इन इंडिया “,दीनदयाल उपाध्याय -ग्रामीण कौशल योजना “, पीएम स्वनिधि “, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना”, मनरेगा ( काँग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई थी)
इन सभी योजनाओं से कुछ हद तक बेरोजगार युवाओं की मदद तो हो रही है लेकिन ये सिर्फ लोन देने की सहूलियत देती है। व्यावहारिक स्तर पर ये योजनाएं अधिक कारगर सिद्ध नहीं हो सकती क्योंकि बेरोजगारी का बढ़ता स्तर इन योजनाओं से कम नहीं किया जा सकता।
सरकार को बेरोजगारी से निपटने के लिए अन्य तरीकों की खोज करनी होगी। बेरोजगारी में सबसे बड़ा कारण बढ़ती जनसंख्या भी है।

  • सरकार को जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए कानून बनाना चाहिए ताकि बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित किया का सके।
  • विदेशी कम्पनियों के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाने चाहिए, सरकार को उन्हें भारत में अपनी कम्पनियों को खोलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • रोजगार के नए अवसरों को तलाशना, औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देकर -औद्योगिक क्षेत्र में व्याप्त खामियों को दूर करके व आर्थिक सहायता देकर रोजगार के अधिक अवसर सृजित करना ,ग्रामीण क्षेत्रों में लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना।
  • लोन सम्बन्धित योजनाओं में ब्याज़ दर कम करना व योजनाओं में पारदर्शिता रखना ताकि वास्तविक आंकड़ों की मदद से कमियों में सुधार किया जा सके।
  • कृषि क्षेत्रों में संसाधनों की पूर्ति व कृषि को बढ़ावा देकर । अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने बीबीसी को 2020 में दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत में
    बेरोजगारी को दूर करने के लिए सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्रों की बेरोजगारी को कम करना होगा। वह कहते हैं कि भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में जो गिरावट आई है उस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि अल्पकालिक उपाय के रूप में “ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना” जैसे कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना होगा साथ ही विकास को बेहतर ढंग से विकसित करने के लिए राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों के बारे में विचार करना होगा। निवेश की दर बढ़ने से विकास सम्भव होगा।
  • पहले ग्रामीण ढाँचे को सुधारना व वहाँ अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में रोजगार फल -फूल सके ,असन्तुलन न हो ।

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