एनजीटी ने 23 राज्यों को पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के सबंन्ध में नोटिस भेजा

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– बिगड़ती हवा में और अधिक बढ़ सकते हैं कोविड-19 के मामले।

– त्यौहारों के सीजन में वायु प्रदूषण का खतरा अधिक हो सकता है।

– पटाखों के प्रतिबंध पर एनजीटी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मांगा जवाब ।

कोविड-19 के बढ़ते मामले और वायु गुणवत्ता का बिगड़ता स्तर देख नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ( एनजीटी ) ने बुधवार को 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पटाखों पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए नोटिस जारी करा ।

इस मामले में दलीलों के एक समूह ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के हित में पटाखों को 7 नवम्बर से 30 नवंबर तक की अवधि के लिए प्रतिबंधित किया हैया नहीं इस पर अपना मत रखा। हालांकि यह एनजीटी के दो दिन बाद आया है पर्यावरण मंत्रालय ,दिल्ली पुलिस आयुक्त ,दिल्ली , हरियाणा और राजस्थान की सरकारों ,केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी करा कि क्या कुछ समय के लिए पटाखों पर रोक लगाई जाए।

एनजीटी के चेयरपर्सन आर्दश कुमार गोयल की खंडपीठ ने बुधवार को आवेदनों की एक बैच पर अन्य राज्यों से जवाब मांगा है।

बढ़ते मामलों और खराब वातावरण को देखते हुए एनजीटी ने इस विषय में पहले ही कुछ पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिए है। ओडिसा और राजस्थान को नोटिस नहीं भेजा था। वहीं दिल्ली में केवल प्रदूषण मुक्त पटाखों को ही अनुमति दी गई है। इसके साथ ही एनजीटी का कहना कि पटाख़ों के कारण और उनसे निकलने वाली हानिकारक गैसों से अस्थमा के मरीज़ो ,बच्चों व कोविड-19 के मरीज़ो के लिए खतरा है। समय पर उचित निर्णय न लेने से कोविड-19 के मामले बढ़ सकते हैं।

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