सार्वजनिक स्थानों पर विरोध के लिए अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं किया जा सकता है, सुप्रीम कोर्ट

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केंद्र ने ऋण स्थगन मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हलफनामा दायर किया
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन के खिलाफ याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रदर्शन के लिए सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर लोगों द्वारा अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की एक पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फैसला सुनाया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों या सड़कों को प्रदर्शन करने के लिए ब्लॉक नहीं कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध किसी सार्वजनिक स्थान पर स्वीकार्य नहीं किया जाएगा और कहा कि संबंधित अधिकारियों को इसे देखना चाहिए।

खंडपीठ ने कहा, सार्वजनिक स्थलों या स्थानों पर चाहे शाहीन बाग़ हो या अन्य पर अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं किया जा सकता। प्रशासन को ऐसे स्थानों को अवरोधों से मुक्त रखना चाहिए। विरोध निर्धारित स्थानों पर ही किया जाना चाहिए।

पीठ ने 21 सितंबर को शाहीन बाग विरोध के मद्देनजर विरोध के अधिकार पर दिशा-निर्देश और अन्य निर्देशों की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रखा था, जहां लोगों का समूह दिल्ली और नोएडा को जोड़ने वाली प्रमुख सड़क को अवरुद्ध करके नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में महीनों तक सड़क जाम किये हुए थे।

शीर्ष अदालत याचिकाकर्ता और वकीलों अमित साहनी और शशांक देव सुधी द्वारा विरोध प्रदर्शन के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। प्रदेर्शंकारियों ने उच्च-यातायात सड़क को अवरुद्ध कर दिया जिससे आने-जाने वालों को परेशानी हो रही थी, याचिका में प्रदर्शनकारियों को हटाने की मांग की जा रही थी।

CAA और प्रस्तावित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स के खिलाफ पिछले साल दिसंबर के मध्य से दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं सहित हजारों लोगों ने जीडी बिड़ला मार्ग को बंद कर दिया था।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ताओं – संजय हेज, साधना रामचंद्रन और पूर्व नौकरशाह वजाहत हबीबुल्लाह को प्रदर्शनकारियों से बात करने और उन्हें वैकल्पिक स्थान पर प्रदर्शन करने के लिए समझाने के लिए नियुक्त किया था।

वार्ताकारों ने फरवरी में सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत में जमा करा दिया था।

इस मामले में दायर याचिकाओं में केंद्र सहित प्रतिवादियों को विरोध/आंदोलन करने के लिए प्रतिबंधों से संबंधित विस्तृत और व्यापक दिशा-निर्देश निर्धारित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी जिससे सार्वजनिक स्थान में बाधा उत्पन्न हो रही हो।

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