सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि परिवार और गवाहों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए?

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि हाथरस की 19 वर्षीय दलित लड़की के कथित सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले में परिवार के सदस्यों और गवाहों की सुरक्षा कैसे की जा रही है?

भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की एक पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को यह पता लगाने के लिए कहा कि क्या पीड़ित परिवार ने किसी वकील को नियुक्त किया है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पीड़ित के परिवार के सदस्यों को पहले ही सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है। हम याचिका पर कोई प्रतिकूल विचार नहीं रख रहे हैं। गवाह पहले से ही संरक्षण में हैं। उन्होंने, पीड़ित परिवार के वकील के लिए कहा, उन पर वकील न थोपें।

उसके बाद, CJI बोबडे ने मेहता से पूछा कि क्या गवाह संरक्षण अधिनियम लागू है। “हम इस बात का हलफनामा चाहते हैं कि गवाहों की सुरक्षा कैसे की जा रही है और हम चाहते हैं कि आप यह पता लगा सकें कि क्या पीड़ित परिवार ने किसी वकील को नियुक्त किया है। हम एक सुझाव चाहते हैं कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की कार्यवाही का दायरा क्या है और हम इसे कैसे बढ़ा सकते हैं,” पीठ ने कहा। मामले की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गयी।

शीर्ष अदालत सामाजिक कार्यकर्ता सत्यमा दुबे द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जो केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या विशेष जांच दल (SIT) द्वारा आसीन या सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग कर रहे थे।

मेहता ने कहा कि वह सीबीआई जांच की याचिका का विरोध नहीं कर रहे हैं। जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। हमने सीबीआई जांच की भी सिफारिश की है। हम इस अदालत की निगरानी में जांच का अनुरोध करते हैं। मीडिया में विभिन्न प्रकार कि बातें चल रही हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंग ने कहा, हम इलाहाबाद उच्च न्यायालय के साथ हस्तक्षेप नहीं करना चाहते क्योंकि वह पहले से ही पीड़ित के शव के दाह संस्कार से संबंधित मामले में सुनवाई कर रहा है। उन्होंने आगे कहा, इस मामले को उत्तर प्रदेश से दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित किया जाना चाहिए और इस समय परिवार की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।

CJI बोबडे ने कहा कि अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है क्योंकि घटना चौंकाने वाली है। यह चौंकाने वाला है और हम आपकी बात को समझ रहे हैं, हम नहीं जानते कि आपके पास लोकोस है। घटना हैरान करने वाली और असाधारण है, हम इससे इनकार नहीं कर रहे हैं। हम अपने अधिकार क्षेत्र को जानने के बारे में बात कर रहे हैं, हम कह रहे हैं कि क्या आपके पास लोकस है। CJI बोबडे ने जयसिंग से कहा।

वकील कीर्ति सिंह, जिन्होंने हाथरस मामले पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था, ने सर्वोच्च न्यायालय से ममाले के निगरानी की मांग की थी। हम 100 महिला वकील हैं जो बलात्कार के मुद्दों पर काम कर रही हैं और हम इस बारे में चिंतित हैं। हमने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा। हम इस मामले में अदालत की निगरानी चाहते हैं।

CJI बोबडे ने कहा कि कानून की अदालत में चिंताओं की नकल करने की जरूरत नहीं है। कृपया हमारी बात को समझें कि कानून की अदालत में चिंताओं की नकल करने की आवश्यकता नहीं है। यह एक भयानक घटना है।

जयसिंह ने कहा कि पीड़ितों के परिवार के सदस्यों को गवाह संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित किया जाना चाहिए। हम कोई बाहरी वकील नहीं चाहते, हम राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) से अधिवक्ता चाहते हैं।

CJI ने कहा, केवल NALSA से ही क्यों, हम एक अच्छे वकील की नियुक्ति करेंगे, एक जूनियर और एक वरिष्ठ वकील का नाम दें।

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक हलफनामा दायर कर हाथरस मामले में अदालत की निगरानी वाली सीबीआई जांच के लिए निर्देश मांगे। यह भी प्रस्तुत किया गया कि हाथरस पीड़िता का अंतिम संस्कार क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने और बड़े पैमाने पर हिंसा से बचने के लिए किया गया था।

हाथरस की 19 वर्षीय युवती का पिछले महीने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मृतु हो गयी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़ित को “सर्वाइकल वेर्तेब्रा” का फ्रैक्चर हुआ था। पुलिस ने दावा किया है कि फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चला है कि युवती के साथ बलात्कार नहीं हुआ था।

वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी में भारी नाराजगी है, परिवार के सदस्यों की उपस्थिति के बिना प्रशासन ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया।

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