सुशांत की मौत पर AIIMS की रिपोर्ट के बाद शिवसेना ने राजनेताओं और मीडिया को माफी मांगने के लिए कहा

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सुशांत की मौत पर AIIMS की रिपोर्ट के बाद शिवसेना ने राजनेताओं और मीडिया को माफी मांगने के लिए कहा
सुशांत की मौत पर AIIMS की रिपोर्ट के बाद शिवसेना ने राजनेताओं और मीडिया को माफी मांगने के लिए कहा

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के फोरेंसिक मेडिकल बोर्ड के इस बात की पुष्टि करने के एक दिन बाद कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या कि है, न की उनकी हत्या हुई है। शिवसेना ने सोमवार को अपने मुखपत्र सामाना में मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र की छवि को ‘ बदनाम ‘ करने के लिए राजनेताओं और मीडिया से माफी मांगने को कहा है जो “कुत्ते की तरह भौंकते हैं”, मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र की छवि “खराब” करने के लिए। इसमें दावा किया गया है कि भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र और बिहार में उसके एनडीए सहयोगी जदयू ने बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अभिनेता की मौत को चुनावी मुद्दे के रूप में इस्तेमाल किया।

सत्य कभी छिपाया नहीं जा सकता। सुशांत सिंह मामले में आखिरकार यह सच सामने आ गया है, महाराष्ट्र को बदनाम करने वालों का पर्दाफास हो गया है, इस दौरान मुंबई पुलिस को भी बदनाम किया गया, उन्होंने (विपक्ष और कुछ मीडिया हाउस) जांच पर सवाल उठाए। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा, कुत्ते की तरह भौंकने वाले राजनेताओं और मीडिया चैनलों को महाराष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।

आगामी बिहार विधानसभा चुनावों को देखते हुए दिवंगत अभिनेता के परिवार को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ दल ने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को हस्तांतरित करने के 24 घंटे के भीतर पता चला कि वह ड्रग्स का सेवन करता है।

केंद्र सरकार ने सुशांत के पटना कनेक्शन का इस्तेमाल अपने स्वार्थी और राजनीति के लिए किया और बुलेट ट्रेन की रफ्तार से भी ज्यादा गति के साथ जांच CBI को ट्रांसफर कर दिया। मुंबई पुलिस ने जिस गुप्त तरीके से मामले की जांच की, वह केवल यह सुनिश्चित करने के लिए था कि मौत के बाद कोई तमाशा न बन जाए। लेकिन जब सीबीआई ने मुंबई आकर जांच शुरू की तो पहले 24 घंटे में सुशांत का ‘गांजा’ और ‘चरस’ प्रकरण प्रकाश में आया। CBI की जांच में पता चला कि सुशांत चरित्रहीन कलाकार थे।

शिवसेना ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिवंगत अभिनेता की मौत का मुद्दा उठाया क्योंकि उनके पास चुनाव लड़ने के लिए कोई और मुद्दा नहीं था और इसके लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे का इस्तेमाल किया गया था।

शिवसेना ने कहा, नीतीश कुमार और वहां के अन्य नेताओं (बिहार) ने यह मुद्दा इसलिए उठाया क्योंकि बिहार चुनाव में प्रचार के लिए कोई दूसरा विषय नहीं था। इसके लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे को उनकी वर्दी में प्रदर्शन करने के लिए कहा गया और बाद में उसी वर्दी को छोड़ वह नीतीश कुमार की पार्टी में शामिल हो गए।

शिवसेना ने हाथरस मामले पर अपनी चुप्पी को लेकर अभिनेता कंगना रनौत से भी सवाल किया।

सुशांत की मौत का इस्तेमाल करने वाली अभिनेत्री ने मुंबई को “पाकिस्तान” और “बाबर” तक कह  दिया था, अब वह किस बिल में छिपी है? हाथरस में एक युवती के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई। वहां की पुलिस ने महिला के शव का अपमान किया और रात में लाश को जला दिया। इस पर अभिनेत्री ने दो आंसू भी नहीं बहाए, नकली भी नहीं। जिन लोगों ने उस लड़की के साथ बलात्कार किया, क्या वे उस अभिनेत्री के भाई-बहन हैं? पुलिसकर्मी जिन्होंने लड़की को जलाया क्या वे अभिनेत्री के घरेलू नौकर हैं।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि मुखर अभिनेता ने ट्विटर पर “बलात्कारियों को सार्वजनिक रूप से” शूट करने के लिए कहा था, उसी दिन 19 वर्षीय हाथरस महिला ने 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया।

इन बलात्कारियों को सार्वजनिक रूप से गोली मारो, इन गैंग रेपों का क्या समाधान है जो हर साल संख्या में बढ़ रहे हैं? इस देश के लिए दुखद और शर्मनाक दिन है। हम पर शर्म करो हमने अपनी बेटियों को फेल कर दिया, आने वाली फिल्म डाउन साउथ के लिए शूटिंग में व्यस्त कंगना ने ट्वीट किया था।

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