बलूचिस्तान में युवकों के अपहरण और हत्याओं के खिलाफ बलूच विरोध में सिंधी भी शामिल

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बलूचिस्तान में युवकों के अपहरण और हत्याओं के खिलाफ बलूच विरोध में सिंधी भी शामिल हुए
बलूचिस्तान में युवकों के अपहरण और हत्याओं के खिलाफ बलूच विरोध में सिंधी भी शामिल हुए

सिंधी कार्यकर्ता टोरंटो में बलूच के साथ पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शनों में शामिल हुए, जो इस्लामाबाद से बलूच युवाओं के अपहरण और हत्या को रोकने की मांग कर रहे लोगों को नई ऊर्जा मिली हैं।

उन्होंने पाकिस्तान विरोधी नारे लगाए और प्रधानमंत्री इमरान खान सरकार से आग्रह किया कि वह इस क्षेत्र में अपने सैन्य अभियानों को समाप्त करे जिसने पिछले कुछ हफ्तों में दर्जनों बलूच युवाओं, कार्यकर्ताओं और नेताओं का सफाया कर दिया है।

बलूच अपने समुदाय पर पाकिस्तानी सेनाओं द्वारा किए जा रहे अपराधों के खिलाफ पुरे यूरोप, उत्तरी अमेरिका और दुनिया भर के अन्य प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शनों की एक श्रृंखला का आयोजन कर रहे हैं।

उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है, वे कहते हैं ये किसी मानवीय संकट से कम नहीं है।

इस्लामाबाद से इसी तरह के बर्ताव का सामना करने वाले सिंधियों का कहना है कि वे बलूच के साथ एकजुटता से खड़े हैं।

वर्ल्ड सिंधी कम्युनिटी, कनाडा के ऑर्गनाइज़र हजान कलहोरो ने कहा कि पाकिस्तानी बर्बरता समय के साथ बढ़ रही है और इसका पूरे समुदायों पर प्रभाव पड़ा रहा है।

हजारों बलूच और सिंधियों का अपहरण कर लिया गया है, हजारों को प्रताड़ित किया गया और बेरहमी से उनकी हत्या की गई है। सैकड़ों बलूच लोगों को सामूहिक कब्र में दफना दिया गया, पाकिस्तान और दुनिया में हर कोई जानता है कि ऐसा कौन कर रहा है। उनकी क्रूरता रुकने का नाम नहीं ले रही है यह पुरे समाज के लिए दुःस्वप्न, पीड़ा और दर्द का कारन है।

पाकिस्तान वर्षों से क्षेत्र के संसाधनों का दोहन कर रहा है। बलूचों का कहना है कि उन्हें उनका हिस्सा नहीं दिया जाता है जिनके वे हक़दार हैं।

बलूच लोगों का यह भी कहना है कि जब से चीन CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे) के लिए इस यहाँ आया है, तब से पाकिस्तान ने अपने औद्योगिक और अवसंरचनात्मक मिशनों को तेज कर दिया है। वे कहते हैं कि दोनों ने यहाँ के संसाधनों को लूटने के लिए हाथ मिलाया है।

इस शोषण के लिए बलूच प्रतिरोध को दबाने के लिए पाकिस्तान की तरफ से क्रूर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बलूचों को रोकने के लिए धमकियों और हिंसा को प्रमुख औजार के रूप में इस्तेमाल किया है। और अब यह क्षेत्र लगातार क्रूर दमन देख रहा है जिसमें युवाओं को चिह्नित किया जाता है, उठाया जाता है और मार दिया जाता है।

कल्होरो ने कहा, क्या हमने कोई जुर्म किया जो इस तरह की बर्बरता हमारे साथ किया जा रहा है? हमने बिलकुल नहीं किया है। बलूच और सिंधी राष्ट्र के इन बेहतरीन बेटे और बेटियों का अपराध यह है कि वे अपने ऐतिहासिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और मानव अधिकारों की मांग करते हैं। हमारा एकमात्र अपराध यह है कि प्रकृति ने हमें भारी प्राकृतिक संसाधन दिए हैं। सिंध में, उन्होंने हमारी भूमि, संसाधनों और नौकरियों पर कब्जे का रास्ता अपनाया है। कोई भी इस अवैध, अनैतिक, क्रूर और नृशंस तबाही को रोकने की हिम्मत नहीं करता।

उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों पर आरोप लगते हुए कहा कि सिंध और बलूचिस्तान दोनों में दमनकारी रणनीति का उपयोग कर अधिकारों, समानता और स्वतंत्रता की मांग करने वाली आवाज़ों को दबाया जा रहा है।

कल्होरो ने कहा, कराची के आस-पास के गाँवों को नष्ट करना, निवासियों को डराना, अपमानित करना और पारिस्थितिकी तंत्र का विनाश करना, ऐसे लोगों की पूर्ण अवहेलना के लिए सैकड़ों योजनाएँ बनाई गयी है जो सिंध भूमि के ऐतिहासिक मालिक हैं उनकी जनसांख्यिकी को बदलने की कि कोसिस जारी हैं। और यदि यह पर्याप्त नहीं, तो वे बलूचिस्तान और सिंध के पूर्ण उपनिवेशीकरण की राह पर हैं।  संघीय सरकार ने एक असंवैधानिक तटीय विकास प्राधिकरण के गठन के नाम पर बलूचिस्तान और सिंध की तटीय हजारों एकड़ भूमि को जब्त करने की अपनी योजना घोषित की है।

बलूच नियमित रूप से पाकिस्तान में भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं लेकिन उन्हें कभी भी मीडिया का साथ नहीं मिला। बलूचियों ने उन पर सरकारी दबाव बनाने और बल प्रयोग करने का आरोप लगाया।

बलूच आंदोलन को अपना समर्थन देने की हिम्मत रखने वाले कुछ लोग सरकार की मनमानी कार्रवाई के शिकार हो गए हैं।

बलूच का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मुद्दे पर संज्ञान लेना चाहिए और पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

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