कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी है

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कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी है
कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी है

राजनीतिक कार्यकर्ताओं, असंतुष्ट राजनीतिक नेताओं और सरकार के मनमाने आदेशों के अनुरूप नहीं चलने वाले लोगों के खिलाफ प्रशासन द्वारा करवाई करने के कारण, अवैध रूप से कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान में कस्बों और गांवों में गुस्से की लहर फैल गई है।

पूरे इलाके के लोग सड़कों पर उतर आए हैं और उन कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग कर रहे हैं, जिन्हें गलत तरीके से फंसाया गया और कठोर दंड दिया गया है।

बाबा जान एक प्रमुख स्थानीय कार्यकर्ता और नेता हैं जो 90 साल की सजा काट रहे हैं उनकी तस्वीरें लेकर लोग सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं, लोगों ने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में बढ़ते प्रतिरोध से डर गई है।

क्षेत्र के एक स्थानीय राजनीतिक नेता अमजद हुसैन ने कहा कि पाकिस्तान की सरकार अपने निरंकुश रवैये के लिए वैश्विक मंच पर बेनकाब हो गई है और अब वह लोगों की आवाज को दवाने के लिए ये सभी हथकंडे अपना रही है।

अमजद ने कहा, हमारे कई भाई सालों से जेल में बंद हैं। उनके बारे में हर कोई जानता है। यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र ने भी अपनी रिपोर्ट में उनका उल्लेख किया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में इसका उल्लेख है। वे सभी गिलगित बाल्टिस्तान के भाइयों पर हो रहे अत्याचारों को जानते हैं।

अवामी एक्शन कमेटी के स्थानीय नेता और गिलगित बाल्टिस्तान के राजनीतिक कार्यकर्ता शबीर मयर ने युवाओं से सरकार की बर्बरता के खिलाफ एकजुट रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकार उन सभी आवाजों को खत्म करने की योजना बना रही है, जिनसे उनको चुनौती मिलती है।

मेयर ने कहा, सरकार के इशारे पे पंजाब से नौकरशाह आते हैं और जो लोग सरकार के विरुद्ध आवाज उठाते हैं उनका दमन कर के चले जाते हैं। इस कारण से क्षेत्र में व्यापार को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे व्यवसायी हुए हैं। वास्तव में इस क्षेत्र के कठिन परिश्रम करने वाले लोग घोर गरीबी में जी रह रहे हैं। हमें एक साथ आना होगा और आवाज उठना होगा, वरना, धीरे धीरे ही सही लेकिन निश्चित रूप से वे हम सभी को मार डालेंगे। हमें भविष्य के लिए खुद को संभालना होगा।

स्थानीय नेताओं को जिन्हें दैनिक समाचार पत्रों और समाचार चैनलों में जगह नहीं मिलती है उन्होंने आने वाले समय में लोगों से और भी अधिक संख्या में इकट्ठा होने की अपील की है।

उन्होंने सरकार से क्षेत्र में निर्धारित चुनावों से पहले बाबा जन और अन्य कार्यकर्ताओं को रिहा करने के लिए भी कहा है।

पाकिस्तान दशकों से इस क्षेत्र के संसाधनों को लुट रहा है और यहाँ के लोगों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

अधिकारों की मांग गिलगित बाल्टिस्तान में एक अलिखित अपराध बन गया है। जिस किसी ने भी इस भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत की है, उसे डराया धमकाया जाता है और इससे भी बात नहीं बनती है तो कारावास में दाल दिया जाता है।

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