GST काउंसिल का 5 साल से अधिक मुआवजा उपकर लगाने का विचार

0
91
GST काउंसिल का 5 साल से अधिक मुआवजा उपकर लगाने का विचार
GST काउंसिल का 5 साल से अधिक मुआवजा उपकर लगाने का विचार

जीएसटी परिषद ने सोमवार को अपनी 42 वीं बैठक में राजस्व अंतर को पूरा करने के लिए पांच साल से अधिक समय के लिए मुआवजा उपकर लगाने का फैसला किया।

केंद्र ने राज्यों के अनुरोध पर भी उधार विकल्प के तहत 97,000 करोड़ रुपये से राशि को 1.10 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने का फैसला किया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी लागू होने के कारण राजस्व की कमी के करान 21 राज्यों ने उधार के लिए विकल्प 1 चुनाव् किया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र किसी भी राज्य को मुआवजे से इनकार नहीं कर रहा है लेकिन जिन राज्यों ने किसी उधार विकल्प को नहीं चुना है, उन्हें बाजार से कर्ज लेना होगा।

हमने राज्यों को मुआवजे से इनकार नहीं किया है। आज की बैठक में किसी ने भी विभाजन के लिए नहीं कहा है, राज्यों के साथ चर्चा जारी है। अगली जीएसटी परिषद की बैठक 12 अक्टूबर को है, इसलिए जिन राज्यों को ऋण लेना है, उन्हें इंतजार करना होगा।

जीएसटी परिषद की सिफारिशों के अनुसार, 2020 के दौरान राजस्व की हानि की दिशा में केंद्र आज राज्यों को 20,000 करोड़ रुपये का मुआवजा जारी कर रहा है और अगले सप्ताह तक 2017-18 के IGST के लिए लगभग 25,000 करोड़ रुपये की राशि जारी करेगा।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि वर्तमान GSTR-1 / 3B रिटर्न फाइलिंग प्रणाली को 31 मार्च 2021 तक बढ़ाया जाएगा और GSTR-1 / 3B रिटर्न फाइलिंग प्रणाली को डिफ़ॉल्ट रिटर्न फाइलिंग प्रणाली के रूप में संशोधित करने के लिए जीएसटी कानूनों में संशोधन किया जाएगा।

विशेष रूप से 5 करोड़ रुपये से कम वार्षिक कारोबार करने वाले छोटे करदाताओं पर अनुपालन बोझ को कम करने की दिशा में एक और कदम बढाया गया है, ऐसे करदाताओं द्वारा मासिक भुगतान के साथ त्रैमासिक आधार पर रिटर्न दाखिल करने की अनुमति देने की परिषद की पहले की सिफारिश 1 जनवरी, 2021 से लागू की जाएगी।

इस तरह के तिमाही करदाता, तिमाही के पहले दो महीनों के लिए, ऑटो-जनरेटेड चालान का उपयोग करके अंतिम तिमाही के शुद्ध नकद कर दायित्व का 35 प्रतिशत भुगतान करने का विकल्प रखते हैं।

परिषद ने सिफारिश किया है कि 1 जनवरी, 2021 से रजिस्ट्रार के पैन और आधार के साथ जुड़े वैध बैंक खाते में रिफंड का भुगतान किया जाएगा। यह भी सुझाव दिया कि ISRO , एंट्रिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड और NSIL द्वारा आपूर्ति की गई उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं को छूट दी जाएगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here